सिंहासन बत्तीसी की छठी पुतली रविभामा एक दिन विक्रमादित्य नदी के तट पर बने हुए अपने महल से प्राकृतिक सौन्दर्य …
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सिंहासन बत्तीसी की पाँचवीं पुतली लीलावती हमेशा की तरह एक दिन विक्रमादित्य अपने दरबार में राजकाज निबटा रहे थे तभी …
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सिंहासन बत्तीसी की चौथी पुतली कामकंदला एक दिन राजा विक्रमादित्य दरबार को सम्बोधित कर रहे थे तभी किसी ने सूचना …
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सिंहासन बत्तीसी की तीसरी पुतली चन्द्रकला एक बार पुरुषार्थ और भाग्य में इस बात पर ठन गई कि कौन बड़ा …
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पहली पुतली रत्नमंजरी राजा विक्रम के जन्म तथा इस सिंहासन प्राप्ति की कथा बताती है। आर्यावर्त में एक राज्य था जिसका नाम था …
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सिंहासन बत्तीसी की दूसरी पुतली चित्रलेखा एक दिन राजा विक्रमादित्य शिकार खेलते-खेलते एक ऊँचे पहाड़ पर आए। वहाँ उन्होंने देखा …
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