सिंहासन बत्तीसी की नवीं पुतली मधुमालती एक बार राजा विक्रमादित्य ने राज्य और प्रजा की सुख-समृद्धि के लिए एक विशाल …
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सिंहासन बत्तीसी की आठवीं पुतली पुष्पवती राजा विक्रमादित्य अद्भुत कला-पारखी थे। उन्हें श्रेष्ठ कलाकृतियों से अपने महल को सजाने का …
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सिंहासन बत्तीसी की सातवीं पुतली कौमुदी : एक दिन राजा विक्रमादित्य अपने शयन-कक्ष में सो रहे थे। अचानक उनकी नींद …
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सिंहासन बत्तीसी की छठी पुतली रविभामा एक दिन विक्रमादित्य नदी के तट पर बने हुए अपने महल से प्राकृतिक सौन्दर्य …
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सिंहासन बत्तीसी की पाँचवीं पुतली लीलावती हमेशा की तरह एक दिन विक्रमादित्य अपने दरबार में राजकाज निबटा रहे थे तभी …
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सिंहासन बत्तीसी की चौथी पुतली कामकंदला एक दिन राजा विक्रमादित्य दरबार को सम्बोधित कर रहे थे तभी किसी ने सूचना …
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